कुरान - 23:68 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

68
أَفَلَمۡ يَدَّبَّرُواْ ٱلۡقَوۡلَ أَمۡ جَآءَهُم مَّا لَمۡ يَأۡتِ ءَابَآءَهُمُ ٱلۡأَوَّلِينَ

Transliteration: (Afalam yaddabbarrul qawla am jaaa'ahum maa lam yaati aabaaa'ahumul awwaleen)

68. तो क्या उन्होंने इस कलाम (क़ुरआन) पर ग़ौर नहीं किया? या उनके पास कोई ऐसी बात आई है जो उनके अगले बाप-दादा के पास नहीं आई थी [101] ? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 68 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 68 की तफ़सीर

"तो क्या उन्होंने इस कलाम (क़ुरआन) पर ग़ौर नहीं किया? या उनके पास कोई ऐसी बात आई है जो उनके अगले बाप-दादा के पास नहीं आई थी [101] ?"

[101] क़ुरआन पर तदब्बुर की दावत

अगर वे तअ़स्सुब छोड़कर क़ुरआन की हिकमतों पर ग़ौर करते तो फ़ौरन ईमान ले आते। नीज़ नबूवत कोई अनोखी चीज़ नहीं थी; उनके बाप-दादा (हज़रत इब्राहीम व इस्माईल अलैहिमुस्सलाम) भी नबी थे।

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