कुरान - 23:70 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

70
أَمۡ يَقُولُونَ بِهِۦ جِنَّةُۢۚ بَلۡ جَآءَهُم بِٱلۡحَقِّ وَأَكۡثَرُهُمۡ لِلۡحَقِّ كَٰرِهُونَ

Transliteration: (Am yaqooloona bihee jinnnah; bal jaaa'ahum bilhaqqi wa aksaruhum lil haqqi kaarihoon)

70. या वे कहते हैं कि उन्हें जुनून (पागलपन) है? बल्कि वे तो उनके पास हक़ लेकर आए हैं, और उनमें से अक्सर लोगों को हक़ ही ना-गवार गुज़रता है [103] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 70 की तफ़सीर

"या वे कहते हैं कि उन्हें जुनून (पागलपन) है? बल्कि वे तो उनके पास हक़ लेकर आए हैं, और उनमें से अक्सर लोगों को हक़ ही ना-गवार गुज़रता है [103] ।"

[103] हक़ से नफ़रत: मुनकिरीन की अस्ल बीमारी

हुज़ूर ﷺ की अक़्ल व दानिश का लोहा पूरी दुनिया मानती है। काफ़िरों का इल्ज़ाम सरासर झूठा था। अस्ल बात यह है कि आप ﷺ सरासर हक़ लेकर आए, और काफ़िरों की ख़्वाहिशात चूंकि बातिल थीं, इसलिए उन्हें हक़ से चिढ़ थी।

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