कुरान - 23:61 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
أُوْلَـٰٓئِكَ يُسَٰرِعُونَ فِي ٱلۡخَيۡرَٰتِ وَهُمۡ لَهَا سَٰبِقُونَ

Transliteration: (Ulaaa'ika yusaari'oona fil khairaati wa hum lahaa saabiqoon)

61. यही वे लोग हैं जो नेकियों में जल्दी (सबक़त) करते हैं, और वे ही इनकी तरफ़ आगे बढ़ने वाले हैं [93] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-मोमिनून — आयत 61 की तफ़सीर

"यही वे लोग हैं जो नेकियों में जल्दी (सबक़त) करते हैं, और वे ही इनकी तरफ़ आगे बढ़ने वाले हैं [93] ।"

[93] नेकियों में मुसाबाक़त (आगे बढ़ना)

मोमिनीन की ख़ासियत यह है कि वे नेक कामों में सुस्ती या ताख़ीर नहीं करते बल्कि फ़ौरन आगे बढ़ते हैं, और एक दूसरे से नेकियों में बाज़ी ले जाने की मुबारक़ कोशिश करते हैं।

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