कुरान - 23:75 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

75
۞وَلَوۡ رَحِمۡنَٰهُمۡ وَكَشَفۡنَا مَا بِهِم مِّن ضُرّٖ لَّلَجُّواْ فِي طُغۡيَٰنِهِمۡ يَعۡمَهُونَ

Transliteration: (Wa law rahimnaahum wa kashafnaa maa bihim min durril lalajjoo fee tughyaanihim ya'mahoon)

और अगर हम उन पर रहम फ़रमाएं और जो तकलीफ़ उन्हें पहुंची है उसे दूर कर दें, तो भी वे अपनी सरकशी में अंधे होकर भटकते रहेंगे [110]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 75 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 75

"और अगर हम उन पर रहम फ़रमाएं और जो तकलीफ़ उन्हें पहुंची है उसे दूर कर दें, तो भी वे अपनी सरकशी में अंधे होकर भटकते रहेंगे [110];"

[110] मुसीबत टलने के बावजूद मुसलसल सरकशी

यह आयत मुनकिरीन के दिलों की सख़्ती और हठधर्मी को बेनक़ाब करती है। अगर अल्लाह तआला उन पर रहम फ़रमाकर उनकी मुसीबत और तंगी (जैसे क़हत या बीमारी) को दूर भी फ़रमा दे, तब भी वे अपनी सरकशी और नाफ़रमानी पर अड़े रहेंगे और सीधे रास्ते से दूर भटकते रहेंगे।

उनकी गुमराही इतनी गहरी हो चुकी है कि आज़माइश से नजात उन्हें शुक्रगुज़ारी या तौबा की तरफ़ नहीं लाती, बल्कि उनके तकब्बुर और ढिठाई को और बढ़ा देती है। वे जान-बूझकर हक़ से मुंह मोड़ते हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now