कुरान - 23:79 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

79
وَهُوَ ٱلَّذِي ذَرَأَكُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَإِلَيۡهِ تُحۡشَرُونَ

Transliteration: (Wa Huwal lazee zara akum fil ardi wa ilaihi tuhsharoon)

और वही है जिसने तुम्हें ज़मीन में फैलाया [115], और उसी की तरफ़ तुम सब जमा किए जाओगे; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 79 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 79

"और वही है जिसने तुम्हें ज़मीन में फैलाया [115], और उसी की तरफ़ तुम सब जमा किए जाओगे;"

[115] ज़मीन पर इंसानी आबादी का फैलाव

यह आयत इंसानों की पैदाइश और ज़मीन पर उनके फैलाव में अल्लाह की क़ुदरत व हिकमत को ज़ाहिर करती है:

  • अल्लाह ने इंसानों को अलग-अलग ख़ित्तों और मुल्कों में आबाद किया,

  • एक जान (हज़रत आदम) से पूरी इंसानी नसल को फैलाया, और

  • हर इलाक़े की ज़रूरतों के मुताबिक़ उनके लिए रिज़्क़ व अस्बाब मुहैया फ़रमाए।

गो कि बाज़ ख़ास मौक़ों पर मोजिज़े के तौर पर इंसानों का आसमानों में जाना भी हुआ—जैसे हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) का आसमान पर उठाया जाना, हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) का जन्नत में ठहराव, और हुज़ूर अकरम ﷺ का मेअराज की रात आसमानों की सैर फ़रमाना—लेकिन इंसान का अस्ल मस्कन और आज़माइश की जगह ज़मीन ही है, और मौत के बाद सबने अल्लाह ही की तरफ़ पलटकर हिसाब के लिए जमा होना है।

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