Transliteration: (Wa Huwal lazee yuhyee wa yumeetu wa lahukh tilaaful laili wannahaar; afalaa ta'qiloon)
"और वही है जो ज़िन्दगी देता है और मौत देता है [116], और रात और दिन का बदलना उसी के इख़्तियार में है। तो क्या तुम अक़्ल से काम नहीं लेते?"
यह आयत साबित करती है कि ज़िन्दगी और मौत का हक़ीक़ी मालिक सिर्फ़ अल्लाह तआला है। कोई दूसरा इस कुदरत में शरीक नहीं। अगर कभी अम्बिया-ए-किराम के हाथों मुर्दे ज़िन्दा हुए (जैसे हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम का मुर्दों को ज़िन्दा फ़रमाना), तो वह भी अल्लाह के इज़्न और हुक्म से ब-तौर-ए-मोजिज़ा हुआ। नबी सबब और वासिता होता है, हक़ीक़ी क़ुदरत अल्लाह ही की होती है।
रात और दिन का मुसलसल एक-दूसरे के पीछे आना—रोशनी और तारीकी, गर्मी और सर्दी, काम और सुकून के औक़ात का तग़य्युर—सब अल्लाह की ज़बरदस्त हिकमत और क़ानून के मातहत है। यह रोज़मर्रा का मुशाहिदा अक़्ल वालों को अल्लाह की वहदानियत और अज़ीम क़ुदरत की तरफ़ रहनुमाई करता है।
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