कुरान - 23:82 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

82
قَالُوٓاْ أَءِذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابٗا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَبۡعُوثُونَ

Transliteration: (Qaalooo 'a-izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa 'izaaman 'a-innaa lamab 'oosoon)

उन्होंने कहा, 'क्या जब हम मर जाएंगे और मिट्टी व हड्डियां हो जाएंगे, तो क्या हम सचमुच दोबारा उठाए जाएंगे [118]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 82 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 82

"उन्होंने कहा, 'क्या जब हम मर जाएंगे और मिट्टी व हड्डियां हो जाएंगे, तो क्या हम सचमुच दोबारा उठाए जाएंगे?' [118]"

[118] इस्तेहज़ा (मज़ाक़) के अंदाज़ में दोबारा ज़िंदा होने का इन्कार

यह आयत मुनकिरीन के उस मज़ाक़िया और मुतशक्किकाना अंदाज़ को बयान करती है जो वे दोबारा ज़िन्दा होने के बारे में इख़्तियार करते थे। वे कहते कि जब हमारे जिस्म गल-सड़कर मिट्टी और सूखी हड्डियां बन जाएंगे, तो हमें दोबारा कैसे ज़िन्दगी मिल सकती है?

वे यह भी कहते कि हमारे बाप-दादा को भी यही डरावे दिए गए थे लेकिन क़ियामत न आई। यह उनकी कम अक़्ली और सतही सोच थी कि जिस ज़ात ने उन्हें पहली बार बे-जान माद्दे से पैदा फ़रमाया, वह उन्हें दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।

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