Transliteration: (Qaalooo 'a-izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa 'izaaman 'a-innaa lamab 'oosoon)
"उन्होंने कहा, 'क्या जब हम मर जाएंगे और मिट्टी व हड्डियां हो जाएंगे, तो क्या हम सचमुच दोबारा उठाए जाएंगे?' [118]"
यह आयत मुनकिरीन के उस मज़ाक़िया और मुतशक्किकाना अंदाज़ को बयान करती है जो वे दोबारा ज़िन्दा होने के बारे में इख़्तियार करते थे। वे कहते कि जब हमारे जिस्म गल-सड़कर मिट्टी और सूखी हड्डियां बन जाएंगे, तो हमें दोबारा कैसे ज़िन्दगी मिल सकती है?
वे यह भी कहते कि हमारे बाप-दादा को भी यही डरावे दिए गए थे लेकिन क़ियामत न आई। यह उनकी कम अक़्ली और सतही सोच थी कि जिस ज़ात ने उन्हें पहली बार बे-जान माद्दे से पैदा फ़रमाया, वह उन्हें दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat