कुरान - 23:95 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

95
وَإِنَّا عَلَىٰٓ أَن نُّرِيَكَ مَا نَعِدُهُمۡ لَقَٰدِرُونَ

Transliteration: (Wa innaa 'alaaa an nuriyaka maa na'iduhum laqaadiroon)

और बेशक हम इस बात पर पूरी तरह क़ादिर हैं कि जो वादा हम उनसे कर रहे हैं वह आपको (अपनी आंख से) दिखा दें [130]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 95 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 95

"और बेशक हम इस बात पर पूरी तरह क़ादिर हैं कि जो वादा हम उनसे कर रहे हैं वह आपको दिखा दें [130]।"

[130] अल्लाह के वादों की हक़्क़ानियत और इस्लाम का ग़लबा

यह आयत रसूलुल्लाह ﷺ को इत्मीनान दिलाती है कि अल्लाह तआला अपने वादों को पूरा करने पर क़ादिर-ए-मुतलक़ है।

अलबत्ता यहाँ आम हलाकत (जैसे आसमान से पत्थरों की बारिश या ज़मीन में धंसना) मुराद नहीं, क्योंकि हुज़ूर ﷺ की मौजूदगी में ऐसी हलाकत रोक दी गई थी। बल्कि इसका ज़हूर इस्लाम के ग़लबा, मैदान-ए-बदर और फ़तह-ए-मक्का में मुशरिकों की ज़बरदस्त ज़िल्लत व शिकस्त के ज़रिए हुआ, जिसे रसूलुल्लाह ﷺ और सहाबा-ए-किराम ने अपनी आंखों से देखा।

यह आयत अल्लाह के वादे की सदाक़त और इस्लाम की यक़ीनी फ़तह की बशारत है।

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