Transliteration: (Wa innaa 'alaaa an nuriyaka maa na'iduhum laqaadiroon)
"और बेशक हम इस बात पर पूरी तरह क़ादिर हैं कि जो वादा हम उनसे कर रहे हैं वह आपको दिखा दें [130]।"
यह आयत रसूलुल्लाह ﷺ को इत्मीनान दिलाती है कि अल्लाह तआला अपने वादों को पूरा करने पर क़ादिर-ए-मुतलक़ है।
अलबत्ता यहाँ आम हलाकत (जैसे आसमान से पत्थरों की बारिश या ज़मीन में धंसना) मुराद नहीं, क्योंकि हुज़ूर ﷺ की मौजूदगी में ऐसी हलाकत रोक दी गई थी। बल्कि इसका ज़हूर इस्लाम के ग़लबा, मैदान-ए-बदर और फ़तह-ए-मक्का में मुशरिकों की ज़बरदस्त ज़िल्लत व शिकस्त के ज़रिए हुआ, जिसे रसूलुल्लाह ﷺ और सहाबा-ए-किराम ने अपनी आंखों से देखा।
यह आयत अल्लाह के वादे की सदाक़त और इस्लाम की यक़ीनी फ़तह की बशारत है।
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