कुरान - 23:97 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

97
وَقُل رَّبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنۡ هَمَزَٰتِ ٱلشَّيَٰطِينِ

Transliteration: (Wa qur Rabbi a'oozu bika min hamazaatish Shayaateen)

और आप अर्ज़ कीजिए [133], 'ऐ मेरे रब! मैं शैतानों के वसवसों (उकसाने) से तेरी पनाह मांगता हूँ; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 97 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 97

"और आप अर्ज़ कीजिए [133], 'ऐ मेरे रब! मैं शैतानों के वसवसों से तेरी पनाह मांगता हूँ'।"

[133] शैतानी वसवसों से हिफ़ाज़त की तालीम

इस आयत में रसूलुल्लाह ﷺ को हुक्म हुआ कि शैतान के वसवसों, फ़ित्नों और बहकावों से अल्लाह की पनाह तलब करें। शैतानी वसवसे इंसान को शक, तकब्बुर और गुनाह की तरफ़ ले जाते हैं।

लफ़्ज़ 'क़ुल' (कहिए) की एक रूहानी हिकमत यह है कि:

  • दुआ अल्लाह की सिखाई हुई है, जो मक़बूलियत की ज़ामिन है,

  • और यह दुआ हुज़ूर ﷺ की मुक़द्दस ज़बान से अदा हो रही है, जिससे इसकी तासीर बेपनाह बढ़ जाती है—जैसे बंदूक़ की नाली से निकली गोली सीधा निशाने पर लगती है।

यह दुआ अस्ल में उम्मत के लिए एक दर्स है कि शैतानी हमले हक़ीक़त हैं, और हर मोमिन को हमेशा अल्लाह की पनाह में रहना चाहिए।

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