Transliteration: (Wa qur Rabbi a'oozu bika min hamazaatish Shayaateen)
"और आप अर्ज़ कीजिए [133], 'ऐ मेरे रब! मैं शैतानों के वसवसों से तेरी पनाह मांगता हूँ'।"
इस आयत में रसूलुल्लाह ﷺ को हुक्म हुआ कि शैतान के वसवसों, फ़ित्नों और बहकावों से अल्लाह की पनाह तलब करें। शैतानी वसवसे इंसान को शक, तकब्बुर और गुनाह की तरफ़ ले जाते हैं।
लफ़्ज़ 'क़ुल' (कहिए) की एक रूहानी हिकमत यह है कि:
दुआ अल्लाह की सिखाई हुई है, जो मक़बूलियत की ज़ामिन है,
और यह दुआ हुज़ूर ﷺ की मुक़द्दस ज़बान से अदा हो रही है, जिससे इसकी तासीर बेपनाह बढ़ जाती है—जैसे बंदूक़ की नाली से निकली गोली सीधा निशाने पर लगती है।
यह दुआ अस्ल में उम्मत के लिए एक दर्स है कि शैतानी हमले हक़ीक़त हैं, और हर मोमिन को हमेशा अल्लाह की पनाह में रहना चाहिए।
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