कुरान - 23:98 सूरह अल-मुमिनून अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

98
وَأَعُوذُ بِكَ رَبِّ أَن يَحۡضُرُونِ

Transliteration: (Wa a'oozu bika Rabbi ai-yahduroon)

और ऐ मेरे रब! मैं इस बात से भी तेरी पनाह मांगता हूँ कि वे मेरे पास आएं [134]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मुमिनून आयत 98 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-मोमिनून – आयत 98

"और ऐ मेरे रब! मैं इस बात से भी तेरी पनाह मांगता हूँ कि वे मेरे पास आएं [134]।"

[134] शयातीन के क़रीब आने से पनाह

यह दुआ पिछली आयत का तसल्सुल है—यानी सिर्फ़ वसवसों से ही नहीं, बल्कि शैतान और उसकी फ़ौजों के क़रीब आने और हाज़िर होने से भी पनाह मांगी गई।

इससे यह अज़ीम सबक़ मिलता है कि:

  • बावजूद इसके कि हुज़ूर ﷺ मा'सूम और महफ़ूज़ हैं, फिर भी आप ﷺ ने अल्लाह की बारगाह में आजिज़ी का इज़हार फ़रमाया।

  • यह दुआ साबित करती है कि शैतान हुज़ूर ﷺ पर कभी ग़ालिब नहीं आ सकता।

  • और उम्मत को यह नसीहत है कि इंसान कितना ही परहेज़गार क्यों न हो, उसे कभी शैतान के मक्र व फ़रेब से बेख़ौफ़ नहीं होना चाहिए बल्कि हर लम्हा अल्लाह की पनाह तलब करनी चाहिए।

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