कुरान - 54:12 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
وَفَجَّرۡنَا ٱلۡأَرۡضَ عُيُونٗا فَٱلۡتَقَى ٱلۡمَآءُ عَلَىٰٓ أَمۡرٖ قَدۡ قُدِرَ

Transliteration: (Wa fajjarnal arda 'uyoonan faltaqal maaa'u 'alaaa amrin qad qudir)

और हमने ज़मीन को चश्मों की तरह बहा दिया [18], तो दोनों पानी उस मिक़दार पर मिल गए [19] जो मुक़द्दर हो चुकी थी [20]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 12

"और हमने ज़मीन को चश्मों की तरह बहा दिया [18], तो दोनों पानी उस मिक़दार पर मिल गए [19] जो मुक़द्दर हो चुकी थी [20]!"


[18] ज़मीन से पानी का उबलना

ज़मीन पानी जज़्ब करने के बजाए हर तरफ़ से चश्मों की तरह पानी उगलने लगी, यहाँ तक कि तंदूरों से भी पानी खौल कर बाहर निकल पड़ा।

[19] दोनों पानियों का मिलाप

आसमान से बरसने वाला पानी और ज़मीन से उबलने वाला पानी आपस में मिल गए और पूरे आलम को पानी ने घेर लिया।

[20] तक़दीरी फ़ैसले की तकमील

पानी पहाड़ों की चोटियों से भी चालीस-चालीस हाथ ऊपर तक चढ़ गया, ठीक उसी मिक़दार पर जो अल्लाह की तक़दीर में जालिमों को ग़र्क़ करने के लिए तय हो चुकी थी।

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