Transliteration: (Tajree bi a'yuninaa jazaaa'an liman kaana kufir)
"जो हमारी निगाहों के सामने (हिफ़ाज़त से) तैरती थी [22], उस शख़्स के इनाम के तौर पर जिसे झुठलाया गया था [23]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि उस भयानक तूफ़ान में सिर्फ़ लकड़ी की कश्ती बचा नहीं सकती थी; असल हिफ़ाज़त अल्लाह तआला की नज़र-ए-इनायत थी।
कश्ती में सवार होने वाले तमाम मोमिनीन हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) के तुफ़ैल और वसीले से बचे। इससे साबित हुआ कि अल्लाह के महबूबों का दामन थामने से दुनिया व आख़िरत के तूफ़ानों से नजात मिलती है।
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