कुरान - 54:16 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ

Transliteration: (Fakaifa kaana 'azaabee wa nuzur)

तो कैसा था मेरा अज़ाब और मेरा डराना! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 16

"तो कैसा था मेरा अज़ाब और मेरा डराना!"


रब्बानी अज़ाब की हौलनाकी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जब जालिमों ने नबियों की चेतावनियों को ठुकराया, तो अल्लाह के क़हर ने उन्हें इस तरह पकड़ा कि उनका कोई मददगार न बचा। यह बाद में आने वालों के लिए खुला सबक़ है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now