Transliteration: (Fakaifa kaana 'azaabee wa nuzur)
"तो कैसा था मेरा अज़ाब और मेरा डराना!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जब जालिमों ने नबियों की चेतावनियों को ठुकराया, तो अल्लाह के क़हर ने उन्हें इस तरह पकड़ा कि उनका कोई मददगार न बचा। यह बाद में आने वालों के लिए खुला सबक़ है।
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