Transliteration: (Wa laqat taraknaahaa aayatan fahal min muddakir)
"और बेशक हमने उस (कश्ती) को एक निशानी बनाकर छोड़ दिया, तो क्या कोई है जो नसीहत हासिल करे [24]?"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि कोह-ए-जूदी पर कश्ती-ए-नूह के आसार मुद्दतों तक महफ़ूज़ रहे, यहाँ तक कि सहाबा-ए-किराम ने भी उसके कुछ हिस्सों को देखा। या समंदरों में तैरने वाली तमाम कश्तियाँ उसी की यादगार और कु़दरत की निशानी हैं।
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