कुरान - 54:15 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
وَلَقَد تَّرَكۡنَٰهَآ ءَايَةٗ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ

Transliteration: (Wa laqat taraknaahaa aayatan fahal min muddakir)

और बेशक हमने उस (कश्ती) को एक निशानी बनाकर छोड़ दिया, तो क्या कोई है जो नसीहत हासिल करे [24]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 15

"और बेशक हमने उस (कश्ती) को एक निशानी बनाकर छोड़ दिया, तो क्या कोई है जो नसीहत हासिल करे [24]?"


[24] कश्ती-ए-नूह बतौर निशानी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि कोह-ए-जूदी पर कश्ती-ए-नूह के आसार मुद्दतों तक महफ़ूज़ रहे, यहाँ तक कि सहाबा-ए-किराम ने भी उसके कुछ हिस्सों को देखा। या समंदरों में तैरने वाली तमाम कश्तियाँ उसी की यादगार और कु़दरत की निशानी हैं।

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