कुरान - 54:55 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
فِي مَقۡعَدِ صِدۡقٍ عِندَ مَلِيكٖ مُّقۡتَدِرِۭ

Transliteration: (Fee maq'adi sidqin 'inda Maleekin Muqtadir)

सच्ची बैठकों में, बड़ी क़ुदरत वाले बादशाह (अल्लाह) के हुज़ूर [72]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 55

"सच्ची बैठकों में, बड़ी क़ुदरत वाले बादशाह (अल्लाह) के हुज़ूर [72]।"


[72] सिद्क़ की मजलिस और कुर्ब-ए-इलाही

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत की सबसे आला नेमत अल्लाह तआला का क़ुर्ब और उसका दीदार है:

  • पाक मजलिस: 'मक़अदे सिद्क़' वह बावक़ार और मुक़द्दस नशिस्त है जहाँ किसी क़िस्म का झूठ, बेहूदगी, ग़ीबत या लग़्व बात न होगी, बल्कि हर तरफ़ नूर, रास्ती और रूहानी सुकून होगा।
  • मालिक-ए-मुक़्तदिर का हुज़ूर: अज़ीम बादशाह (अल्लाह तआला) के हुज़ूर में मोमिनीन को जो इज़्ज़त और दीदार नसीब होगा, वह जन्नत की तमाम नेमतों से बढ़कर होगा। हुज़ूर सय्यिदे आलम ﷺ को यह क़ुर्ब दुनिया में ही अता फ़रमाया गया था, जैसा कि हदीस-ए-पाक में है: "मैं अपने रब के पास रात गुज़ारता हूँ, वही मुझे खिलाता और पिलाता है।"

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