Transliteration: (Wa maaa amrunaaa illaa waahidatun ka lamhin bil basar)
"और हमारा हुक्म तो बस एक ही बात है, जैसे आँख का झपकना [67]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जब अल्लाह तआला किसी चीज़ को पैदा फ़रमाना या किसी क़ौम को हलाक करना चाहता है, तो उसे किसी मेहनत, औज़ार या मुद्दत की ज़रूरत नहीं होती। वह सिर्फ़ फ़रमाता है "कुन" (हो जा) और वह चीज़ पलक झपकते ही वजूद में आ जाती है। क़यामत का बरपा होना भी आँख के झपकने की तरह फ़ौरी होगा।
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