कुरान - 54:50 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
وَمَآ أَمۡرُنَآ إِلَّا وَٰحِدَةٞ كَلَمۡحِۭ بِٱلۡبَصَرِ

Transliteration: (Wa maaa amrunaaa illaa waahidatun ka lamhin bil basar)

और हमारा हुक्म तो बस एक ही बात है, जैसे आँख का झपकना [67]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 50

"और हमारा हुक्म तो बस एक ही बात है, जैसे आँख का झपकना [67]!"


[67] क़ुदरत-ए-इलाही की मुकम्मल ताक़त और फ़ौरी निफ़ाज़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जब अल्लाह तआला किसी चीज़ को पैदा फ़रमाना या किसी क़ौम को हलाक करना चाहता है, तो उसे किसी मेहनत, औज़ार या मुद्दत की ज़रूरत नहीं होती। वह सिर्फ़ फ़रमाता है "कुन" (हो जा) और वह चीज़ पलक झपकते ही वजूद में आ जाती है। क़यामत का बरपा होना भी आँख के झपकने की तरह फ़ौरी होगा।

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