Transliteration: (Wa laqad ahlaknaaa ashyaa'akum fahal min muddakir)
"और बेशक हमने तुम्हारे जैसों को हलाक कर डाला [68], तो क्या कोई है नसीहत हासिल करने वाला?"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि तारीख़ गवाह है कि तुमसे पहले भी जो क़ौमें कुफ़्र, शिर्क और नबियों की मुख़ालिफ़त पर उतरीं, वे नेस्त-ओ-नाबूद कर दी गईं। कुफ़्र का अंजाम हमेशा हलाकत है, लिहाज़ा अक़्लमंद वही है जो दूसरों के अंजाम से इबरत और नसीहत हासिल करे।
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