कुरान - 54:51 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
وَلَقَدۡ أَهۡلَكۡنَآ أَشۡيَاعَكُمۡ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ

Transliteration: (Wa laqad ahlaknaaa ashyaa'akum fahal min muddakir)

और बेशक हमने तुम्हारे जैसों को हलाक कर डाला [68], तो क्या कोई है नसीहत हासिल करने वाला? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 51

"और बेशक हमने तुम्हारे जैसों को हलाक कर डाला [68], तो क्या कोई है नसीहत हासिल करने वाला?"


[68] पिछली मुन्किर क़ौमों की हलाकत से सबक़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि तारीख़ गवाह है कि तुमसे पहले भी जो क़ौमें कुफ़्र, शिर्क और नबियों की मुख़ालिफ़त पर उतरीं, वे नेस्त-ओ-नाबूद कर दी गईं। कुफ़्र का अंजाम हमेशा हलाकत है, लिहाज़ा अक़्लमंद वही है जो दूसरों के अंजाम से इबरत और नसीहत हासिल करे।

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