Transliteration: (Wa kullu sagheerinw wa kabeerin mustatar)
"और हर छोटी और बड़ी बात (लौहे महफ़ूज़ में) लिखी हुई है [70]।"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इंसान का कोई बारीक से बारीक ख़्याल या बड़े से बड़ा वाक़िया ऐसा नहीं जो लौह-ए-महफ़ूज़ में क़लम-ए-क़ुदरत से पहले ही न लिखा जा चुका हो। अल्लाह का इल्म तमाम मख़लूक़ात और उनके ज़ाहिर व बातिन को मुहीत है।
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