कुरान - 54:53 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
وَكُلُّ صَغِيرٖ وَكَبِيرٖ مُّسۡتَطَرٌ

Transliteration: (Wa kullu sagheerinw wa kabeerin mustatar)

और हर छोटी और बड़ी बात (लौहे महफ़ूज़ में) लिखी हुई है [70]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 53

"और हर छोटी और बड़ी बात (लौहे महफ़ूज़ में) लिखी हुई है [70]।"


[70] लौह-ए-महफ़ूज़ में तमाम कायनात का इल्म

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इंसान का कोई बारीक से बारीक ख़्याल या बड़े से बड़ा वाक़िया ऐसा नहीं जो लौह-ए-महफ़ूज़ में क़लम-ए-क़ुदरत से पहले ही न लिखा जा चुका हो। अल्लाह का इल्म तमाम मख़लूक़ात और उनके ज़ाहिर व बातिन को मुहीत है।

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