कुरान - 54:54 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي جَنَّـٰتٖ وَنَهَرٖ

Transliteration: (Innal muttaqeena fee jannaatinw wa nahar)

बेशक परहेज़गार बाग़ों और नहरों में होंगे [71]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 54

"बेशक परहेज़गार बाग़ों और नहरों में होंगे [71]।"


[71] जन्नत की नहरें और मुत्तक़ीन का मुक़द्दस मक़ाम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िरों के अज़ाब के बयान के बाद अल्लाह तआला मोमिनीन-ए-मुत्तक़ीन का इनाम बयान फ़रमा रहा है। जन्नत के शादाब बाग़ात और उनके महलों के नीचे बहती हुई पाक पानी, दूध, शहद और पाक शराब की पाकीज़ा नहरें मुत्तक़ियों की ख़िदमत में होंगी।

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