कुरान - 54:48 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

48
يَوۡمَ يُسۡحَبُونَ فِي ٱلنَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمۡ ذُوقُواْ مَسَّ سَقَرَ

Transliteration: (Yawma yus-haboona fin Naari 'alaa wujoohihim zooqoo massa saqar)

जिस दिन वे मुँह के बल आग में घसीटे जाएँगे [65] (और उनसे कहा जाएगा): "जहन्नम की लपटों का मज़ा चखो!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 48 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 48

"जिस दिन वे मुँह के बल आग में घसीटे जाएँगे [65] (और उनसे कहा जाएगा): 'जहन्नम की लपटों का मज़ा चखो!'"


[65] मुँह के बल घसीटा जाना और ज़िल्लत-आमेज़ सज़ा

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि दुनिया में जो चेहरे तकब्बुर से तने रहते थे और अल्लाह के रसूल के सामने झुकने से मुँह फेरते थे, क़यामत के दिन उन्हीं चेहरों के बल अज़ाब के फ़रिश्ते उन्हें घसीटते हुए जहन्नम की दहकती खाई में गिराएँगे। यह इंतिहाई ज़िल्लत और रुसवाई की सज़ा है।

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