कुरान - 54:46 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
بَلِ ٱلسَّاعَةُ مَوۡعِدُهُمۡ وَٱلسَّاعَةُ أَدۡهَىٰ وَأَمَرُّ

Transliteration: (Balis Saa'atu maw'iduhum was Saa'atu adhaa wa amarr)

बल्कि क़यामत उनके वादे का वक़्त है [62], और क़यामत सबसे ज़्यादा सख़्त और सबसे ज़्यादा कड़वी है [63]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 46

"बल्कि क़यामत उनके वादे का वक़्त है [62], और क़यामत सबसे ज़्यादा सख़्त और सबसे ज़्यादा कड़वी है [63]!"


[62] बदर महज़ इब्तिदा है, मुकम्मल अज़ाब क़यामत में होगा

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जंग-ए-बदर की शिकस्त और क़त्ल तो काफ़िरों के लिए महज़ दुनियावी ज़िल्लत की इब्तिदा थी। उनका असल और मुकम्मल अज़ाब क़यामत के दिन होगा जहाँ दोज़ख़ की कभी न ख़त्म होने वाली आग उनका इंतज़ार कर रही है।

[63] क़यामत का दिन—काफ़िरों के लिए कड़वा, मोमिनों के लिए दीदार-ए-इलाही

क़यामत का दिन मुनकिरीन के लिए इंतिहाई हौलनाक, सख़्त और कड़वा होगा, जबकि अहले ईमान और नबी ﷺ के ग़ुलामों के लिए वह रहमत, शफ़ाअत और दीदार-ए-इलाही की अज़ीम नेमतों का दिन होगा।

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