Transliteration: (Am yaqooloona nahnu jamee'un muntasir)
"या वे कहते हैं: 'हम एक मुत्तहिद (मज़बूत) जत्था हैं, ज़रूर बदला लेने वाले (ग़ालिब रहने वाले) हैं [60]?'"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि मक्का के काफ़िरों ने अपने तमाम बाहमी इख़्तिलाफ़ात भुलाकर इस्लाम और हुज़ूर ﷺ की दुश्मनी पर इत्तिफ़ाक़ कर लिया था। जंग-ए-बदर के रोज़ अबू जहल ने बड़े घमंड से कहा था कि हम एक भारी और मुत्तहिद लश्कर हैं, हम ज़रूर मुसलमानों से इंतिक़ाम लेंगे और ग़ालिब रहेंगे।
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