कुरान - 54:44 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
أَمۡ يَقُولُونَ نَحۡنُ جَمِيعٞ مُّنتَصِرٞ

Transliteration: (Am yaqooloona nahnu jamee'un muntasir)

या वे कहते हैं: "हम एक मुत्तहिद (मज़बूत) जत्था हैं, ज़रूर बदला लेने वाले (ग़ालिब रहने वाले) हैं [60]?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 44

"या वे कहते हैं: 'हम एक मुत्तहिद (मज़बूत) जत्था हैं, ज़रूर बदला लेने वाले (ग़ालिब रहने वाले) हैं [60]?'"


[60] मुत्तहिद जत्था और अबू जहल का तकब्बुर

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि मक्का के काफ़िरों ने अपने तमाम बाहमी इख़्तिलाफ़ात भुलाकर इस्लाम और हुज़ूर ﷺ की दुश्मनी पर इत्तिफ़ाक़ कर लिया था। जंग-ए-बदर के रोज़ अबू जहल ने बड़े घमंड से कहा था कि हम एक भारी और मुत्तहिद लश्कर हैं, हम ज़रूर मुसलमानों से इंतिक़ाम लेंगे और ग़ालिब रहेंगे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now