कुरान - 54:43 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
أَكُفَّارُكُمۡ خَيۡرٞ مِّنۡ أُوْلَـٰٓئِكُمۡ أَمۡ لَكُم بَرَآءَةٞ فِي ٱلزُّبُرِ

Transliteration: ('A kuffaarukum khairun min ulaaa'ikum am lakum baraaa'atun fiz Zubur)

क्या तुम्हारे यहाँ के काफ़िर (ऐ अहले मक्का!) उनसे बेहतर हैं [58], या आसमानी किताबों में तुम्हारे लिए कोई रिहाई (सनद) लिखी है [59]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 43

"क्या तुम्हारे यहाँ के काफ़िर (ऐ अहले मक्का!) उनसे बेहतर हैं [58], या आसमानी किताबों में तुम्हारे लिए कोई रिहाई (सनद) लिखी है [59]?"


[58] अहले मक्का के काफ़िरों से ख़िताब और मुवाज़ना

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि ऐ अहले मक्का! क्या तुम्हारे काफ़िर पिछली हलाक होने वाली क़ौमों (क़ौम-ए-नूह, आद, समूद, फ़िरऔन) से माल, ताक़त या फ़ौज में बढ़कर हैं? या क्या तुम्हारा कुफ़्र उनके कुफ़्र से कुछ कम है? जब वे इतने ज़बरदस्त होकर तबाह हो गए तो तुम किस बिना पर इतराते हो?

[59] 'बरात' यानी आसमानी किताबों से रिहाई का परवाना

'बरात' से मुराद परवाना-ए-रिहाई या सनद है। क्या पिछली आसमानी किताबों में अल्लाह ने तुम्हें कोई ऐसा परवाना लिख कर दे रखा है कि तुम जो चाहो कुफ़्र करो और तुम्हें कभी अज़ाब नहीं दिया जाएगा? हरगिज़ नहीं!

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