Transliteration: ('A kuffaarukum khairun min ulaaa'ikum am lakum baraaa'atun fiz Zubur)
"क्या तुम्हारे यहाँ के काफ़िर (ऐ अहले मक्का!) उनसे बेहतर हैं [58], या आसमानी किताबों में तुम्हारे लिए कोई रिहाई (सनद) लिखी है [59]?"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि ऐ अहले मक्का! क्या तुम्हारे काफ़िर पिछली हलाक होने वाली क़ौमों (क़ौम-ए-नूह, आद, समूद, फ़िरऔन) से माल, ताक़त या फ़ौज में बढ़कर हैं? या क्या तुम्हारा कुफ़्र उनके कुफ़्र से कुछ कम है? जब वे इतने ज़बरदस्त होकर तबाह हो गए तो तुम किस बिना पर इतराते हो?
'बरात' से मुराद परवाना-ए-रिहाई या सनद है। क्या पिछली आसमानी किताबों में अल्लाह ने तुम्हें कोई ऐसा परवाना लिख कर दे रखा है कि तुम जो चाहो कुफ़्र करो और तुम्हें कभी अज़ाब नहीं दिया जाएगा? हरगिज़ नहीं!
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat