Transliteration: (Kazzaboo bi Aayaatinaa kullihaa fa akhaznaahum akhza 'azeezim muqtadir)
"उन्होंने हमारी सब निशानियों को झुठलाया [56], तो हमने उन्हें पकड़ा जैसा एक इज़्ज़त वाले, क़ुदरत वाले की पकड़ होती है [57]।"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'निशानियों' से मुराद हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के रौशन मोजि़ज़ात हैं—जैसे असा का अज़दहा बनना, यदे बैज़ा का चमकना, तूफ़ान, टिड्डियाँ, जुएं, मेंढक और ख़ून। तौरेत की आयतें मुराद नहीं हो सकतीं क्योंकि तौरेत शरीफ़ फ़िरऔन के ग़र्क़ होने के बाद नाज़िल हुई थी।
अल्लाह तआला ज़बरदस्त इज़्ज़त और बेपनाह क़ुदरत का मालिक है। जब वह किसी मुतकब्बिर ज़ालिम को अपनी पकड़ में लेता है तो कायनात की कोई ताक़त उसे अल्लाह की गिरफ्त से छुड़ा नहीं सकती।
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