कुरान - 54:40 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرۡءَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ

Transliteration: (Wa laqad yassarnal Qur'aana liz zikri fahal min muddakir)

और बेशक हमने क़ुरआन को याद करने के लिए आसान कर दिया [54], तो क्या कोई है याद करने वाला? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 40

"और बेशक हमने क़ुरआन को याद करने के लिए आसान कर दिया [54], तो क्या कोई है याद करने वाला?"


[54] क़ुरआन हिफ़्ज़ के लिए आसान है, मसाइल निकालने के लिए मुजतहिद दरकार है

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • हिफ़्ज़ की सहूलत: क़ुरआन मजीद को सिर्फ़ याद रखने, हिफ़्ज़ करने और ज़बानी दोहराने के लिए आसान बनाया गया है। हर आम-ओ-ख़ास इसे सीनों में बसा सकता है।
  • मसाइल का इस्तमबात: क़ुरआन से शरीअत के बारीक मसाइल, अहकाम और ग़ूढ़ हक़ाइक़ निकालना हर शख़्स का काम नहीं। इसके लिए मुजतहिदीन और उलमा-ए-रासिख़ीन की ज़रूरत होती है। अगर क़ुरआन से हर कोई सीधे अहकाम समझ सकता तो अल्लाह तआला हुज़ूर ﷺ को उस्ताद और मुअल्लिम बनाकर न भेजता ("और वे उन्हें किताब व हिकमत की तालीम देते हैं")।

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