कुरान - 54:38 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
وَلَقَدۡ صَبَّحَهُم بُكۡرَةً عَذَابٞ مُّسۡتَقِرّٞ

Transliteration: (Wa laqad sabbahahum bukratan 'azaabun mustaqirr)

और बेशक सुबह सवेरे उन पर हमेशा रहने वाला अज़ाब आ पड़ा [52]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 38

"और बेशक सुबह सवेरे उन पर हमेशा रहने वाला अज़ाब आ पड़ा [52]!"


[52] हमेशा रहने वाला अज़ाब और अज़ाब-ए-क़ब्र का सुबूत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़ौम-ए-लूत पर जो अज़ाब सुबह के वक़्त आया, वह सिर्फ़ दुनियावी हलाकत तक महदूद नहीं था, बल्कि वह मौत के बाद अज़ाब-ए-क़ब्र और फिर क़यामत के दायमी दोज़ख़ के अज़ाब से जुड़ गया। यह आयत अज़ाब-ए-क़ब्र के बरहक़ होने की वाज़ेह दलील है।

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