कुरान - 54:36 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
وَلَقَدۡ أَنذَرَهُم بَطۡشَتَنَا فَتَمَارَوۡاْ بِٱلنُّذُرِ

Transliteration: (Wa laqad anzarahum batshatanaa fatamaaraw binnuzur)

और बेशक उन्होंने (हज़रत लूत ने) उन्हें हमारी सख़्त पकड़ से डराया था [47], मगर उन्होंने उन डराने वाली बातों में शक किया (झुठलाया) [48]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 36

"और बेशक उन्होंने (हज़रत लूत ने) उन्हें हमारी सख़्त पकड़ से डराया था [47], मगर उन्होंने उन डराने वाली बातों में शक किया (झुठलाया) [48]।"


[47] हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की दी हुई चेतावनियाँ

हज़रत लूत अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को बार-बार समझाया कि अपने नापाक आमाल से बाज़ आ जाओ वर्ना रब्बे क़हार का सख़्त अज़ाब तुम्हें घेर लेगा।

[48] शक का मफ़हूम—खुला इंकार

यहाँ 'शक किया' से मुराद सरासर इंकार और झुठलाना है। काफ़िरों ने अल्लाह के अज़ाब की चेतावनियों को मज़ाक़ समझा और नबी की बात को मानने से इंकार कर दिया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now