कुरान - 54:34 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
إِنَّآ أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمۡ حَاصِبًا إِلَّآ ءَالَ لُوطٖۖ نَّجَّيۡنَٰهُم بِسَحَرٖ

Transliteration: (Innaa arsalnaa 'alaihim haasiban illaaa aala Lootin najjainaahum bisahar)

बेशक हमने उन पर पत्थरों की आंधी भेजी, सिवाय लूत के घर वालों के; हमने उन्हें सुबह होने से पहले बचा लिया [45]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 34

"बेशक हमने उन पर पत्थरों की आंधी भेजी, सिवाय लूत के घर वालों के; हमने उन्हें सुबह होने से पहले बचा लिया [45]।"


[45] पत्थर बरसाने वाला अज़ाब और सहरी के वक़्त नजात

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • कंकरियों का तूफ़ान: अल्लाह ने क़ौम-ए-लूत पर पत्थरों की बारिश बरसाई जिसने उन्हें तबाह कर दिया।
  • सहरी का मुबारक वक़्त: हज़रत लूत अलैहिस्सलाम और उनके मोमिन अहल-ओ-अयाल को सहरी के वक़्त (सुबह सादिक़ से पहले) सही-सलामत निकाल लिया गया। यह वक़्त रहमतों के नुज़ूल और दुआओं की क़बूलियत का वक़्त है, इसीलिए तहज्जुद की नमाज़ इस मुबारक घड़ी में पढ़ी जाती है।

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