कुरान - 54:35 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
نِّعۡمَةٗ مِّنۡ عِندِنَاۚ كَذَٰلِكَ نَجۡزِي مَن شَكَرَ

Transliteration: (Ni'matan min 'indinaa; kazaalika najzee man shakar)

अपने पास से एक नेमत के तौर पर; हम ऐसा ही बदला देते हैं हर शुक्रगुज़ार को [46]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 35

"अपने पास से एक नेमत के तौर पर; हम ऐसा ही बदला देते हैं हर शुक्रगुज़ार को [46]।"


[46] शुक्रगुज़ारी का इनाम और फ़ज़्ल-ए-इलाही

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हज़रत लूत अलैहिस्सलाम और मोमिनीन की नजात महज़ उनकी तदबीर से नहीं बल्कि अल्लाह तआला के ख़ास फ़ज़्ल व करम से थी। जो बंदा अल्लाह पर ईमान लाता है और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे हर मुसीबत और अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमाता है।

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