कुरान - 54:32 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرۡءَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ

Transliteration: (Wa laqad yassarnal Qur'aana liz zikri fahal min muddakir)

और बेशक हमने क़ुरआन को याद करने के लिए आसान कर दिया, तो क्या कोई है याद करने वाला? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 32

"और बेशक हमने क़ुरआन को याद करने के लिए आसान कर दिया, तो क्या कोई है याद करने वाला?"


क़ुरआन-ए-करीम के हिफ़्ज़ और नसीहत की आसानी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह आयत बार-बार दोहराकर यह पैग़ाम दिया जा रहा है कि अल्लाह का कलाम बंदों की हिदायत के लिए सबसे आसान और मुअस्सिर ज़रिया है। हर मुसलमान को चाहिए कि वह क़ुरआन को याद करे, उसकी तिलावत करे और उसकी नसीहतों पर अमल करे।

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