कुरान - 54:31 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
إِنَّآ أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمۡ صَيۡحَةٗ وَٰحِدَةٗ فَكَانُواْ كَهَشِيمِ ٱلۡمُحۡتَظِرِ

Transliteration: (Innaaa arsalnaa 'alaihim saihatanw waahidatan fakaanoo kahasheemil muhtazir)

बेशक हमने उन पर एक चीख़ (सख़्त धमाका) भेजी [42], तो वे बाड़ लगाने वाले की रौंदी हुई सूखी घास की तरह हो गए [43]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 31

"बेशक हमने उन पर एक चीख़ (सख़्त धमाका) भेजी [42], तो वे बाड़ लगाने वाले की रौंदी हुई सूखी घास की तरह हो गए [43]!"


[42] हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम की हौलनाक चीख़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम को हुक्म दिया, जिन्होंने आसमान से ऐसी हौलनाक चीख़ मारी जिससे काफ़िरों के दिल फट गए और वे अपनी ही जगहों पर ढेर हो गए।

[43] मुनकिरीन की ज़िल्लत और तबाह शुदा लाशें

उनकी हालत ऐसी हो गई जैसे मवेशियों के बाड़े की बाड़ के लिए काटी गई सूखी घास पैरों तले रौंद कर चूर-चूर हो जाती है। उनकी लाशें बेगोरो-कफ़न सड़-गल कर ज़िल्लत का शिकार हुईं।

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