कुरान - 54:29 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
فَنَادَوۡاْ صَاحِبَهُمۡ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَ

Transliteration: (Fa naadaw saahibahum fa ta'aataa fa 'aqar)

फिर उन्होंने अपने साथी (क़ैदार बिन सालिफ़) को पुकारा [40], तो उसने तलवार उठाई और ऊँटनी की कूँचें काट डालीं (उसे क़त्ल कर दिया)! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 29

"फिर उन्होंने अपने साथी (क़ैदार बिन सालिफ़) को पुकारा [40], तो उसने तलवार उठाई और ऊँटनी की कूँचें काट डालीं (उसे क़त्ल कर दिया)!"


[40] क़ैदार बिन सालिफ़ और मुजरेमाना जुर्म

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़ौम ने अपने सबसे बदबख़्त और शरीर शख़्स—क़ैदार बिन सालिफ़—को इस नापाक काम के लिए तय्यार किया। उसने शराब के नशे और सरकशी में आगे बढ़कर मोजि़ज़ा वाली मुक़द्दस ऊँटनी पर हमला किया और उसे मार डाला।

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