Transliteration: (Innaa mursilun naaqati fitnatan lahum fartaqibhum wastabir)
"बेशक हम ऊँटनी भेजने वाले हैं [37] उनकी आज़माइश के लिए, तो ऐ सालेह! उनका इंतज़ार करो और सब्र रखो [38]।"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़ौम के मुतालबा पर पहाड़ की सख़्त चट्टान फाड़कर एक अज़ीम-उल-शान गभन ऊँटनी पैदा की गई। यह सरासर अल्लाह की क़ुदरत और हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम का रौशन मोजि़ज़ा था जो उनकी आज़माइश का ज़रिया बना।
अल्लाह तआला ने अपने नबी को ताकीद फ़रमाई कि आप उनकी हठधर्मी और तकलीफ़ों पर सब्र रखें और देखें कि यह क़ौम इस निशानी के साथ क्या सुलूक करती है।
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