कुरान - 54:47 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
إِنَّ ٱلۡمُجۡرِمِينَ فِي ضَلَٰلٖ وَسُعُرٖ

Transliteration: (Innal mujrimeena fee dalaalinw wa su'ur)

बेशक मुजरिम लोग गुमराही और दीवानेपन (जहन्नम की आग) में हैं [64]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 47

"बेशक मुजरिम लोग गुमराही और दीवानेपन (जहन्नम की आग) में हैं [64]।"


[64] दुनिया, क़ब्र और आख़िरत में मुजरिमों की गुमराही

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि मुजरिमों (काफ़िरों) की बदहाली तीनों जहानों में मुहीत है:

  • दुनिया में: वे सीधे रास्ते और हिदायत से भटक कर नफ़्सानी ख़्वाहिशात के पीछे दीवाने बने रहते हैं।
  • क़ब्र में: मुनकर-नकीर के सवालों के सही जवाब देने से आजिज़ और महरूम रहेंगे।
  • हश्र में: जन्नत का रास्ता उनसे छुपा दिया जाएगा और वे दोज़ख़ की दहकती आग में झोंक दिए जाएँगे।

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