कुरान - 54:17 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرۡءَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ

Transliteration: (Wa laqad yassarnal Qur'aana liz zikri fahal min muddakir)

और बेशक हमने क़ुरआन को याद करने के लिए आसान कर दिया [25], तो क्या कोई है जो याद करने वाला हो [26]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 17

"और बेशक हमने क़ुरआन को याद करने के लिए आसान कर दिया [25], तो क्या कोई है जो याद करने वाला हो [26]?"


[25] क़ुरआन-ए-पाक का हिफ़्ज़ में आसान होना

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने क़ुरआन को ज़बानी याद (हिफ़्ज़) करने और नसीहत हासिल करने के लिए निहायत आसान बना दिया है। दुनिया की कोई किताब ऐसी नहीं जिसके लाखों हाफ़िज़ हर ज़माने में मौजूद हों, सिवाए क़ुरआन के। अलबत्ता उसके गहरे मानी और अहकाम समझना उलमा और हुज़ूर ﷺ की तालीम पर मौक़ूफ़ है।

[26] तौफ़ीक़-ए-इलाही और हिफ़्ज़ की फ़ज़ीलत

क़ुरआन की तिलावत और हिफ़्ज़ अल्लाह की ख़ास अता और तौफ़ीक़ से मुमकिन होती है। जो दिल से इसकी तरफ़ रुजूअ करता है, अल्लाह उसके सीने को अपने नूर से खोल देता है।

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