Transliteration: (Innaa arsalnaa 'alaihim reehan sarsaran fee Yawmi nahsin mustamirr)
"बेशक हमने उन पर एक सख्त आंधी भेजी, ऐसे दिन में जिसकी नहूसत उन पर मुसलसल छाई रही [28]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'यौमि नह्सिम मुस्तमिर्र' से मुराद वह दिन है जिसमें उन पर अज़ाब शुरू हुआ (बुध का दिन) और लगातार सात रात आठ दिन तक चलता रहा। जिस दिन इंसान अल्लाह के ज़िक्र से ग़ाफ़िल हो और उस पर अज़ाब आए, वही दिन नहूसत वाला है।
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