कुरान - 54:19 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
إِنَّآ أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمۡ رِيحٗا صَرۡصَرٗا فِي يَوۡمِ نَحۡسٖ مُّسۡتَمِرّٖ

Transliteration: (Innaa arsalnaa 'alaihim reehan sarsaran fee Yawmi nahsin mustamirr)

बेशक हमने उन पर एक सख्त आंधी भेजी, ऐसे दिन में जिसकी नहूसत उन पर मुसलसल छाई रही [28]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 19

"बेशक हमने उन पर एक सख्त आंधी भेजी, ऐसे दिन में जिसकी नहूसत उन पर मुसलसल छाई रही [28]!"


[28] नहूसत का तसव्वुर और आंधी का अज़ाब

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'यौमि नह्सिम मुस्तमिर्र' से मुराद वह दिन है जिसमें उन पर अज़ाब शुरू हुआ (बुध का दिन) और लगातार सात रात आठ दिन तक चलता रहा। जिस दिन इंसान अल्लाह के ज़िक्र से ग़ाफ़िल हो और उस पर अज़ाब आए, वही दिन नहूसत वाला है।

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