कुरान - 54:21 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ

Transliteration: (Fakaifa kaana 'azaabee wa nuzur)

तो कैसा रहा मेरा अज़ाब और मेरा डराना! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 21

"तो कैसा रहा मेरा अज़ाब और मेरा डराना!"


अल्लाह के अज़ाब की शिद्दत और हौलनाकी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह आयत अल्लाह तआला के अज़ाब की शिद्दत और उसके यक़ीनी होने का बयान करती है:

  • क़ौम-ए-आद की हलाकत: क़ौम-ए-आद को हुज़ूर हज़रत हूद अलैहिस्सलाम के ज़रिये साफ़-साफ़ चेतावनियाँ दी गईं, मगर उन्होंने तकब्बुर और सरकशी इख़्तियार की, जिसके नतीजे में भयानक आंधी ने उन्हें तबाह व बर्बाद कर दिया।
  • इबरत का सबक़: अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है कि जो लोग इलाही चेतावनियों के बावजूद कुफ़्र और नाफ़रमानी पर अड़े रहते हैं, उन पर अल्लाह की पकड़ का आना लाज़िमी और अटल है।

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