कुरान - 54:22 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرۡءَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ

Transliteration: (Wa laqad yassarnal Qur'aana liz zikri fahal min muddakir)

और बेशक हमने क़ुरआन को याद करने के लिए आसान कर दिया, तो क्या कोई है याद करने वाला [30]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 22

"और बेशक हमने क़ुरआन को याद करने के लिए आसान कर दिया, तो क्या कोई है याद करने वाला [30]?"


[30] क़ुरआन-ए-पाक को याद करने की आसानी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन की सहूलत: अल्लाह तआला ने क़ुरआन-ए-करीम के अल्फ़ाज़ और मआनी को याद करने के लिए बेहद आसान बना दिया है। यही वजह है कि सात-आठ साल के बच्चे भी पूरा क़ुरआन सीनों में महफ़ूज़ कर लेते हैं, जो दुनिया की किसी दूसरी किताब के लिए मुमकिन नहीं।
  • फ़र्ज़-ए-किफ़ाया: क़ुरआन मजीद को महफ़ूज़ रखना और हिफ़्ज़ करना उम्मत पर फ़र्ज़-ए-किफ़ाया है ताकि हर ज़माने में अल्लाह का कलाम महफ़ूज़ रहे।

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