Transliteration: (Faqaalooo a' basharan minnaa waahidan nattabi'uhooo innaa izal lafee dalaalinw wa su'ur)
"और वे बोले: 'क्या हम अपने ही में से एक आदमी की पैरवी करें [32]? तब तो बेशक हम ज़रूर गुमराही और दीवानेपन में पड़े होंगे [33]!'"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:
काफ़िरों ने गुस्ताख़ी करते हुए कहा कि अगर हम अपने ही जैसे एक शख़्स की इताअत कर लें, तो हम अक़्ल से ख़ाली और पागल समझे जाएँगे। वे अपने तकब्बुर में अंधे होकर हक़ से दूर हो गए।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat