कुरान - 54:18 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
كَذَّبَتۡ عَادٞ فَكَيۡفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ

Transliteration: (Kazzabat 'Aadun fakaifa kaana 'azaabee wa nuzur)

आद ने झुठलाया [27], तो कैसा था मेरा अज़ाब और मेरा डराना! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 18

"आद ने झुठलाया [27], तो कैसा था मेरा अज़ाब और मेरा डराना!"


[27] क़ौम-ए-आद की हठधर्मी और अंजाम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़ौम-ए-आद ने हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) की दावत को झुठलाया और अपनी ताक़त व जिस्मानी डील-डौल पर घमंड किया। आखिरकार अल्लाह के अज़ाब ने उन्हें नेस्त-ओ-नाबूद कर दिया।

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