कुरान - 54:10 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
فَدَعَا رَبَّهُۥٓ أَنِّي مَغۡلُوبٞ فَٱنتَصِرۡ

Transliteration: (Fada'aa Rabbahooo annee maghloobun fantasir)

तो उन्होंने अपने रब से दुआ की [15]: "बेशक मैं बेबस हूँ, तो तू (मेरा) बदला ले [16]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 10

"तो उन्होंने अपने रब से दुआ की [15]: 'बेशक मैं बेबस हूँ, तो तू (मेरा) बदला ले [16]!'"


[15] हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) का सब्र और दुआ

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने साढ़े नौ सौ साल तक सब्र फ़रमाया। जब क़ौम की तरफ़ से हिदायत की कोई उम्मीद न रही और उन्होंने क़त्ल की धमकियाँ दीं, तब हज़रत नूह ने बारगाह-ए-इलाही में दुआ की।

[16] नबियों की दुआ और रब्बानी इंतिक़ाम

अल्लाह तआला अपने नबियों और औलिया की हिमायत फ़रमाता है। जब नबी अपनी आजिज़ी और बेबसी पेश करता है, तो अल्लाह की ग़ैबी ताक़तें और अज़ाब जालिमों को तबाह करने के लिए हरकत में आ जाते हैं।

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