कुरान - 54:9 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
۞كَذَّبَتۡ قَبۡلَهُمۡ قَوۡمُ نُوحٖ فَكَذَّبُواْ عَبۡدَنَا وَقَالُواْ مَجۡنُونٞ وَٱزۡدُجِرَ

Transliteration: (Kazzabat qablahum qawmu Noohin fakazzaboo 'abdanaa wa qaaloo majnoonunw wazdujir)

उनसे पहले नूह की क़ौम ने झुठलाया, उन्होंने हमारे (ख़ास) बंदे को झूठा कहा और बोले: "यह दीवाना है और उन्हें झिड़का गया (डराया धमकाया गया) [14]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 9

"उनसे पहले नूह की क़ौम ने झुठलाया, उन्होंने हमारे (ख़ास) बंदे को झूठा कहा और बोले: 'यह दीवाना है और उन्हें झिड़का गया (डराया धमकाया गया) [14]!'"


[14] हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की आज़माइशें

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हुज़ूर ﷺ को तसल्ली देने के लिए हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र फ़रमाया गया। उनकी क़ौम ने उन्हें झूठा और मजनूँ कहा और पत्थर मारने व क़त्ल करने की धमकियाँ दीं। नबियों को हमेशा मुख़ालफ़त का सामना करना पड़ा मगर हक़ आखिरकार ग़ालिब आया।

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