Transliteration: (Muhti'eena ilad daa'i yaqoolul kaafiroona haazaa yawmun 'asir)
"पुकारने वाले की तरफ़ दौड़ते हुए [12]! काफ़िर कहेंगे: 'यह दिन बड़ा सख़्त दिन है [13]!'"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि उस दिन किसी को भागने या छुपने की जगह नहीं मिलेगी, सब बे-इख़्तियार पुकारने वाले की तरफ़ खिंचे चले जाएँगे।
काफ़िर उस दिन की सख़्ती और अज़ाब को देखकर कहेंगे कि आज का दिन बड़ा भारी है। क़यामत का दिन काफ़िरों के लिए पचास हज़ार साल का निहायत भयानक दिन होगा, जबकि सच्चे मोमिनीन के लिए एक फ़र्ज़ नमाज़ के वक़्त से भी ज़्यादा आसान और पुर-सुकून बना दिया जाएगा (सूरह नमल 27:89)।
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