कुरान - 54:7 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
خُشَّعًا أَبۡصَٰرُهُمۡ يَخۡرُجُونَ مِنَ ٱلۡأَجۡدَاثِ كَأَنَّهُمۡ جَرَادٞ مُّنتَشِرٞ

Transliteration: (Khushsha'an absaaruhum yakhrujoona minal ajdaasi ka annahum jaraadum muntashir)

उनकी आँखें झुकी हुई होंगी, वे क़ब्रों से इस तरह निकलेंगे गोया वे बिखरी हुई टिड्डियाँ हैं [11]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 7

"उनकी आँखें झुकी हुई होंगी, वे क़ब्रों से इस तरह निकलेंगे गोया वे बिखरी हुई टिड्डियाँ हैं [11]!"


[11] क़यामत में मुर्दों का क़ब्रों से निकलना

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़यामत के दिन जब लोग क़ब्रों से उठेंगे, तो शर्म और ख़ौफ़ से उनकी आँखें नीची होंगी। बे-हिसाब मख़लूक़ इस तरह बद-हवास दौड़ेगी जैसे टिड्डी दल चारों तरफ़ बिखर कर उड़ता है। यह क़यामत की हौलनाकी का अज़ीम नक़्शा है।

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