Transliteration: (Khushsha'an absaaruhum yakhrujoona minal ajdaasi ka annahum jaraadum muntashir)
"उनकी आँखें झुकी हुई होंगी, वे क़ब्रों से इस तरह निकलेंगे गोया वे बिखरी हुई टिड्डियाँ हैं [11]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़यामत के दिन जब लोग क़ब्रों से उठेंगे, तो शर्म और ख़ौफ़ से उनकी आँखें नीची होंगी। बे-हिसाब मख़लूक़ इस तरह बद-हवास दौड़ेगी जैसे टिड्डी दल चारों तरफ़ बिखर कर उड़ता है। यह क़यामत की हौलनाकी का अज़ीम नक़्शा है।
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