Transliteration: (Hikmatun baalighatun famaa tughnin nuzur)
"कामिल हिकमत (क़ुरआन) है [8], फिर डराने वाले उन्हें क्या फ़ायदा पहुँचाएँगे?"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'हिकमतुम बालिग़ह' से मुराद क़ुरआन मजीद है जो हिकमत, मारिफ़त और फ़साहत व बलाग़त के आला तरीन मेयार पर है। मगर जिस बदनसीब के दिल पर मोहर लग चुकी हो, उसे बेहतरीन नसीहत और सच्चे रसूल का डराना भी फ़ायदा नहीं पहुँचाता।
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