कुरान - 54:5 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
حِكۡمَةُۢ بَٰلِغَةٞۖ فَمَا تُغۡنِ ٱلنُّذُرُ

Transliteration: (Hikmatun baalighatun famaa tughnin nuzur)

कामिल हिकमत (क़ुरआन) है [8], फिर डराने वाले उन्हें क्या फ़ायदा पहुँचाएँगे? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 5

"कामिल हिकमत (क़ुरआन) है [8], फिर डराने वाले उन्हें क्या फ़ायदा पहुँचाएँगे?"


[8] क़ुरआन-ए-पाक की कामिल हिकमत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'हिकमतुम बालिग़ह' से मुराद क़ुरआन मजीद है जो हिकमत, मारिफ़त और फ़साहत व बलाग़त के आला तरीन मेयार पर है। मगर जिस बदनसीब के दिल पर मोहर लग चुकी हो, उसे बेहतरीन नसीहत और सच्चे रसूल का डराना भी फ़ायदा नहीं पहुँचाता।

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