Transliteration: (Wa kazzaboo wattaba'ooo ahwaaa'ahum; wa kullu amrin mustaqirr)
"और उन्होंने झुठलाया और अपनी नफ़्सानी ख़्वाहिशात की पैरवी की [4], और हर काम का एक मुक़र्ररा वक़्त है [5]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि मोजि़ज़ा-ए-शक्कुल क़मर देखने के बाद भी मुशरिकीन अपनी नफ़्सानी ख़्वाहिशात और हसद के ताबे होकर कुफ़्र पर क़ायम रहे। मक्का आने वाले क़ाफ़िलों ने भी इसकी गवाही दी, मगर मुनकिर अपनी ज़िद पर अड़े रहे।
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'कुल्लु अम्रिम मुस्तक़िर्र' से दो मानी हैं:
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