कुरान - 54:4 सूरह अल-क़मर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
وَلَقَدۡ جَآءَهُم مِّنَ ٱلۡأَنۢبَآءِ مَا فِيهِ مُزۡدَجَرٌ

Transliteration: (Wa laqad jaaa'ahum minal anbaaa'i maa feehi muzdajar)

और बेशक उनके पास वे ख़बरें आ चुकी हैं [6] जिनमें काफ़ी डराने वाली नसीहतें हैं [7]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़मर आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़मर तफ़सीर - आयत 4

"और बेशक उनके पास वे ख़बरें आ चुकी हैं [6] जिनमें काफ़ी डराने वाली नसीहतें हैं [7]!"


[6] तारीख़ी वाक़िआत की अहमियत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इस आयत से दो बातें साबित होती हैं:

  1. इस्लाम मशहूर और मुतवातिर वाक़िआत को दलील के तौर पर अहमियत देता है। पिछली क़ौमों की हलाकत के वाक़िआत और उनके खंडहर अहले-अरब के सामने मशहूर और जाने-पहचाने थे।
  2. तारीख़ और साबिक़ा क़ौमों के हालात का मुतालआ करना बा-फ़ायदा और इब्रत-अंगेज़ अमल है।

[7] पिछली क़ौमों की बर्बादी से नसीहत

अहले-अरब अच्छी तरह जानते थे कि क़ौम-ए-आद, समूद, नूह और लूत कैसे तबाह हुईं। अगर वे अक़्ल से काम लेते तो हुज़ूर ﷺ की नबुव्वत को झुठलाने की जुर्रत न करते।

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