Transliteration: (Wa lammaa balagha ashuddahoo wastawaaa aatai naahu hukmanw wa 'ilmaa; wa kazaalika najzil muhsineen)
"और जब वे अपनी जवानी को पहुंचे और पूरे तनावर (मज़बूत) हो गए, तो हमने उन्हें हिकमत और इल्म अता फ़रमाया [34]; और हम नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला देते हैं [35]।"
जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम चालीस साल की उम्र को पहुंचे और जिस्मानी व अक़्ली एतबार से मुकम्मल पुख़्ता हो गए, तो अल्लाह तआला ने उन्हें शरीअत की समझ, फ़ैसला करने की हिकमत और दीनी उलूम अता फ़रमाए।
अल्लाह तआला अपने नेक और मुख़्लिस बंदों को इसी तरह दुनिया व आख़िरत में इज्ज़त, इल्म और बुलंदी का इनाम बख़्शता है।
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