कुरान - 28:14 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
وَلَمَّا بَلَغَ أَشُدَّهُۥ وَٱسۡتَوَىٰٓ ءَاتَيۡنَٰهُ حُكۡمٗا وَعِلۡمٗاۚ وَكَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡمُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Wa lammaa balagha ashuddahoo wastawaaa aatai naahu hukmanw wa 'ilmaa; wa kazaalika najzil muhsineen)

और जब वे अपनी जवानी को पहुंचे और पूरे तनावर (मज़बूत) हो गए, तो हमने उन्हें हिकमत और इल्म अता फ़रमाया [34]; और हम नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला देते हैं [35]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 14

"और जब वे अपनी जवानी को पहुंचे और पूरे तनावर (मज़बूत) हो गए, तो हमने उन्हें हिकमत और इल्म अता फ़रमाया [34]; और हम नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला देते हैं [35]।"

[34] हिकमत और इल्म की अता

जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम चालीस साल की उम्र को पहुंचे और जिस्मानी व अक़्ली एतबार से मुकम्मल पुख़्ता हो गए, तो अल्लाह तआला ने उन्हें शरीअत की समझ, फ़ैसला करने की हिकमत और दीनी उलूम अता फ़रमाए।

[35] नेकोकारों को जज़ा

अल्लाह तआला अपने नेक और मुख़्लिस बंदों को इसी तरह दुनिया व आख़िरत में इज्ज़त, इल्म और बुलंदी का इनाम बख़्शता है।

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