कुरान - 28:13 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
فَرَدَدۡنَٰهُ إِلَىٰٓ أُمِّهِۦ كَيۡ تَقَرَّ عَيۡنُهَا وَلَا تَحۡزَنَ وَلِتَعۡلَمَ أَنَّ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٞ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Faradadnaahu ilaa ummihee kai taqarra 'ainuhaa wa laa tahzana wa lita'lama anna wa'dal laahi haqqunw wa laakinna aksarahum laa ya'lamoon (section 1))

पस हमने उन्हें उनकी माँ के पास वापस पहुंचा दिया [31] ताकि उनकी आँखें ठंडी हों और वे ग़म न करें, और ताकि वे जान लें कि बेशक अल्लाह का वादा सच्चा है [32], लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [33]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 13

"पस हमने उन्हें उनकी माँ के पास वापस पहुंचा दिया [31] ताकि उनकी आँखें ठंडी हों और वे ग़म न करें, और ताकि वे जान लें कि बेशक अल्लाह का वादा सच्चा है [32], लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [33]।"

[31] माँ की गोद में वापसी

हज़रत मूसा की वालिदा को महल में बुलाया गया। बच्चे ने अपनी माँ की ख़ुशबू पहचान ली और फ़ौरन दूध पीना शुरू कर दिया। फ़िरऔन ने ख़ुश होकर हज़रत मूसा को उनकी ही माँ के सुपुर्द कर दिया और परवरिश का वज़ीफ़ा भी मुक़र्रर किया। सुब्हानअल्लाह! कैसी अज़ीम शान है परवरदिगार की!

[32] अल्लाह के सच्चे वादे का मुशाहिदा

ताकि मूसा की वालिदा अपनी आँखों से देख लें कि अल्लाह ने जो वापसी का वादा फ़रमाया था वह अक्षरशः सच साबित हुआ।

[33] लोगों की बे-ख़बरी

लेकिन अक्सर लोग अल्लाह की कुदरत, हिकमत और ग़ैबी तदबीरों से बे-ख़बर रहते हैं और ज़ाहिरी अस्बाब ही को सब कुछ समझ बैठते हैं।

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