कुरान - 28:16 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
قَالَ رَبِّ إِنِّي ظَلَمۡتُ نَفۡسِي فَٱغۡفِرۡ لِي فَغَفَرَ لَهُۥٓۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ

Transliteration: (Qaala Rabbi innee zalamtu nafsee faghfir lee faghafaralah; innahoo Huwal Ghafoorur Raheem)

उन्होंने अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! बेशक मैंने अपनी जान पर ज़ुल्म किया [43], पस मुझे बख़्श दे!' तो अल्लाह ने उन्हें बख़्श दिया; बेशक वही बहुत बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है [44]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 16

"उन्होंने अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! बेशक मैंने अपनी जान पर ज़ुल्म किया [43], पस मुझे बख़्श दे!' तो अल्लाह ने उन्हें बख़्श दिया; बेशक वही बहुत बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है [44]।"

[43] आजिज़ी और इस्तिग़फ़ार

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने निहायत आजिज़ी और इनकिसारी से बारगाह-ए-इलाही में तौबा की कि बे-इरादा एक जान का ज़ियाअ हुआ। अंबिया-ए-किराम मासूम होते हैं, उनकी यह आजिज़ी मक़ाम-ए-क़ुर्ब की बिना पर थी।

[44] मग़फ़िरत व रहमत

अल्लाह तआला ने उनकी दुआ क़बूल फ़रमाई और उन्हें माफ़ फ़रमा दिया, क्योंकि अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला और मेहरबान है।

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